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Vidroh Karo Vidroh Karo | Shivmangal Singh Suman
Episode 971
विद्रोह करो, विद्रोह करो। शिवमंगल सिंह 'सुमन'
आओ वीरोचित कर्म करो
मानव हो कुछ तो शर्म करो
यों कब तक सहते जाओगे, इस परवशता के जीवन से
विद्रोह करो, विद्रोह…
8 months, 1 week ago
Mujhe Ab Darr Nahi Lagta | Mohsin Naqvi
Episode 970
मुझे अब डर नहीं लगता | मोहसिन नक़वी
किसी के दूर जाने से
तअ'ल्लुक़ टूट जाने से
किसी के मान जाने से
किसी के रूठ जाने से
मुझे अब डर नहीं लगता
किसी को आज़माने …
8 months, 1 week ago
Purana Ghar | Gobind Prasad
Episode 969
पुराना घर। गोबिंद प्रसाद
पुराना घर
इतना पुराना
कि कभी पुराना नहीं होता
कविता की उस किताब की तरह
पंक्तियों के बीच
ठहरे हुए किसी अनबीते की तरह
मन में बसा रहता…
8 months, 1 week ago
Dukh | Priyankshi Mohan
Episode 968
दुख | प्रियाँक्षी मोहन
पिताओं के दुख
माँओं के दुखों से
मुख़्तलिफ़ होते हैं।
वे कभी भी प्रत्यक्ष
रूप से नहीं दिखते
वे चूहों से झाँकते हैं
अधजली सिगरेटों से
खू…
8 months, 1 week ago
Phoole Kadamb | Nagarjun
Episode 967
फूले कदंब । नागार्जुन
फूले कदंब
टहनी-टहनी में कंदुक सम झूले कदंब
फूले कदंब।
सावन बीता
बादल का कोप नहीं रीता
जाने कब से तू बरस रहा
ललचाई आँखों से नाहक
जाने कब…
8 months, 1 week ago
Nafi | Kishwar Naheed
Episode 966
नफ़ी | किश्वर नाहीद
मैं थी आईना फ़रोश* (विक्रेता)
कोह-ए-उम्मीद* (आशा का पहाड़) के दामन में
अकेली थी ज़ियाँ* (नुक़्सान) कोशिश
सुरय्या की थी हम-दोश
मुझे हर …
8 months, 1 week ago
Ma | Srinaresh Mehta
Episode 965
माँ । श्रीनरेश मेहता
मैं नहीं जानता
क्योंकि नहीं देखा है कभी—
पर, जो भी
जहाँ भी लीपता होता है
गोबर के घर-आँगन,
जो भी
जहाँ भी प्रतिदिन दुआरे बनाता होता है
आटे…
8 months, 2 weeks ago
Raat Yun Dil Mein | Faiz Ahmed Faiz
Episode 964
रात यूँ दिल में तिरी खोई हुई याद आई | फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
रात यूँ दिल में तिरी खोई हुई याद आई
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए
जैसे सहराओं में हौले से च…
8 months, 2 weeks ago
Nritya Aur Parikathayein | Anwesha Rai 'Mandakini'
Episode 963
नृत्य और परिकथाएँ | अन्वेषा राय 'मंदाकिनी'
मेरे पाँव,
बचपन से थिरकते रहे,
किसी अनजान सवालिया धुन पर...
मैं बढ़ती रही.. नाचती रही..
मेरे जीवन का उद्देश्य य…
8 months, 2 weeks ago
Main Aur Main | Saqi Farooqi
Episode 962
मैं और मैं! | साक़ी फ़ारुक़ी
मैं हूँ मैं
वो जिस की आँखों में जीते जागते दर्द हैं
दर्द कि जिन की हम-राही में दिल रौशन है
दिल जिस से मैं ने इक दिन इक अहद (…
8 months, 2 weeks ago