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Humein Bhool Jana Chahiye | Afzal Ahmed Sayyid
Episode 1031
हमें भूल जाना चाहिए । अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
उस ईंट को भूल जाना चाहिए
जिस के नीचे हमारे घर की चाबी है
जो एक ख़्वाब में टूट गया
हमें भूल जाना चाहिए
उस बोसे को …
6 months, 1 week ago
Badi Bi | Aniruddh Umat
Episode 1030
बड़ी-बी। अनिरुद्ध उमट
बड़ी-बी दरवाज़ा खोलो
तुम्हारी पान
घुँघरू, ख़त लाने में हुई मुझसे देरी बहुत
'हम नहीं जानते तुम कौन हो'
बड़ी-बी हाथ में ख़त लिए
मुँह मे…
6 months, 1 week ago
Aadmi Akela | Leeladhar Jagudi
Episode 1029
आदमी अकेला । लीलाधर जगूड़ी
तारीख़ें भी तीस
और आदमी अकेला
हफ़्ते भी चार
और आदमी अकेला
महीने भी बारह
और आदमी अकेला
ऋतुएँ भी छह
और आदमी अकेला
वर्ष भी अनेक
और आदमी…
6 months, 1 week ago
Dus Se Upar | Sarwat Hussain
Episode 1028
दस से ऊपर। सरवत हुसैन
इतने घर
इतने सय्यारे
कंकर पत्थर कौन गिने
दस से ऊपर कौन गिने
औज़ारों के नाम बहुत हैं
हथियारों के दाम बहुत हैं
ऐ सौदागर कौन गिने
दस से ऊप…
6 months, 1 week ago
Ek Accha Gaon | Ajay
Episode 1027
एक अच्छा गाँव । अजेय
एक अच्छे आदमी की तरह
एक अच्छा गाँव भी
एक बहुचर्चित गाँव नहीं होता
अपनी गति से आगे सरकता
अपनी पाठशाला में ककहरा सीखता
अपनी ज़िंदगी के प…
6 months, 1 week ago
Vimanspardhi | Gyanendrapati
Episode 1026
विमानस्पर्धी। ज्ञानेन्द्रपति
खगपथों पर
पक्षियों से जा टकराते हैं विमान, अन्धाधुन्द
और ध्वन्स का ज़िम्मेदार
पक्षी को ठहराया जाता है
बेसबब बेसब्र चील को
द…
6 months, 2 weeks ago
Ma Aur Aag | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 1025
माँ और आग। विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
यह उस समय की बात है
जब माचिस का आविष्कार नहीं हुआ था
माँ थोड़ी-सी आग जलाकर रख देती
सवेरे रोटी सेंकने के लिए
रात को जब सभ…
6 months, 2 weeks ago
Gori Soyi Sej Par | Madan Kashyap
Episode 1024
गोरी सोयी सेज पर । मदन कश्यप
शब्द जो नंदिनी के खुर के नीचे दब कर भी नहीं मरे, राजा दिलीप के आतंक से मर गये कालिदास से पूछो कि धमनियों का रक्त पिला-पिल…
6 months, 2 weeks ago
Atmaparichay | Harivansh Rai Bachchan
Episode 1023
आत्मपरिचय। हरिवंशराय बच्चन
मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ,
फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ;
कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर
मैं साँसों के दो तार ल…
6 months, 2 weeks ago
Dushwari | Javed Akhtar
Episode 1022
दुश्वारी। जावेद अख़्तर
मैं भूल जाऊँ तुम्हें
अब यही मुनासिब है
मगर भुलाना भी चाहूँ तो किस तरह भूलूँ
कि तुम तो फिर भी हक़ीक़त हो
कोई ख़्वाब नहीं
यहाँ तो दिल …
6 months, 2 weeks ago