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मिट्ठू-बेटे | स्टोरीबॉक्स | EP 39
"बेगम अपने मिट्ठू बेटे को दिन रात सबक रटाया करती थीं लेकिन वो ज़हन से कुछ गधे मालूम होते थे, कुछ न सीख सके। बल्कि सुनते-सुनते मुझे याद हो गया। एक रात…
3 years, 2 months ago
मैं एक पति हूं | स्टोरीबॉक्स | EP 38
ट्रेन खिसकना शुरु हो गयी थी। मेरी बीवी रौशन आरा ने कहा, "अपना ख्याल रखिएगा, फोन करते रहिएगा" मैंने कहा "हां" मेरा मन भारी हो रहा था। ट्रेन ने रफ्तार …
3 years, 2 months ago
चचाजान का कुत्ता सीज़र | स्टोरीबॉक्स | EP 37
उनके सीज़र से इतना प्यार था कि अगर कोई दौड़ा-दौड़ा उनके घर आए और कहे कि फायर ब्रिगेड को फोन करना है तो भी वो पहले उसे अपने प्यारे कुत्ते का एल्बम दिख…
3 years, 3 months ago
चचा छक्कन | स्टोरीबॉक्स | EP 36
मोहल्ले के झगड़े की आवाज़ सुनकर चचा नीचे आए तो देखा कि मजमा लगा है। बोले, "अरे भई क्या मामला हो गया" एक साहब ने कहा, "अरे कुछ नहीं, मामला सुलट गया है…
3 years, 3 months ago
स्विस बैंक में खाता हमारा | स्टोरीबॉक्स | EP 35
हमने अपनी बीवी को खुश करने के लिए यूं ही कह दिया कि स्विस बैंक में हमारा एक ख़ूफ़िया खाता है। पर ग़लती ये हो गयी कि ये भी कह दिया कि किसी से कहना नही…
3 years, 3 months ago
फ़ोटोग्राफ़र | क़ुर्रतुल ऐन हैदर | स्टोरीबॉक्स | EP 34
अब वो फ़ोटोग्राफ़र बहुत बूढ़ा हो चुका है और गेस्ट हाउस के फाटक पर टीन की कुर्सी डाले बैठा रहता है और सैलानियों की तस्वीरें उतारता है। पंद्रह साल बाद …
3 years, 3 months ago
फ़ोटोग्राफ़र | क़ुर्रतुल ऐन हैदर | स्टोरीबॉक्स | EP 34
अब वो फ़ोटोग्राफ़र बहुत बूढ़ा हो चुका है और गेस्ट हाउस के फाटक पर टीन की कुर्सी डाले बैठा रहता है और सैलानियों की तस्वीरें उतारता है। पंद्रह साल बाद …
3 years, 3 months ago
वरना हम भी आदमी थे काम के | स्टोरीबॉक्स | EP 33
खां साहब स्टैनली रोड पर आराम से खड़े गाड़ियों का चालान कर रहे थे कि उसी वक्त एक तेज़ रफ़्तार गाड़ी आई और उन्हें ठोकती हुई रुक गयी। खां साहब के चेहरे …
3 years, 4 months ago
मिर्ज़ा की पुरानी साइकिल | स्टोरीबॉक्स | EP 32
मिर्ज़ा साहब ने कहा, "अरे भई मुझे पैसे नहीं चाहिए, पर तुम ज़बरदस्ती देना चाहो तो जो जी करे दे दो" मैंने चालीस रुपए उनकी जेब में डाल दिए। अगली सुबह नौ…
3 years, 4 months ago
बहादुर अल्ला दित्ता फ़ायरमैन | कॉमेडी | स्टोरीबॉक्स | EP 31
राइटर ने गला खंखारते हुए कहा, "रात का वक्त था अचानक एक ऊंची इमारत की चौथी मंज़िल से आग की लपटें उठने लगीं। एक आदमी चिल्लाया - आग, आग, बचाओ, बचाओ" एडि…
3 years, 4 months ago