Podcast Episodes
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Main Phool | Gopaldas Neeraj
Episode 975
मैं फूल । गोपालदास "नीरज"
निर्जन की नीरव डाली का मैं फूल !
कल अधरों में
मुस्कान लिए आया था,
मन में अगणित
अरमान लिए आया था,
पर आज झर गया
खिलने से पहले ही,
साथ…
10 months ago
Tanhai | Shahryar
Episode 974
तन्हाई । शहरयार
अँधेरी रात की इस रहगुज़र पर
हमारे साथ कोई और भी था
उफ़ुक़* (क्षितिज) की सम्त* (दिशा) वो भी तक रहा था
उसे भी कुछ दिखाई दे रहा था
उसे भी कुछ…
10 months, 1 week ago
Shabd Aur Arth Ek Beech | Gayatribala Panda
Episode 973
शब्द और अर्थ के बीच। गायत्रीबाला पंडा
शब्द और अर्थ के बीच
एक नारी ही बदल जाती है
लंबे इंतज़ार में।
ख़ुद को कोड़ती है
बीज बोती है
अनाज उपजाती है
धरती को सदाब…
10 months, 1 week ago
Ankhein Dekhkar | Gorakh Pandey
Episode 972
आँखें देखकर । गोरख पांडेय
ये आँखें हैं तुम्हारी
तकलीफ़ का उमड़ता हुआ समुंदर
इस दुनिया को
जितनी जल्दी हो
बदल देना चाहिए।
10 months, 1 week ago
Vidroh Karo Vidroh Karo | Shivmangal Singh Suman
Episode 971
विद्रोह करो, विद्रोह करो। शिवमंगल सिंह 'सुमन'
आओ वीरोचित कर्म करो
मानव हो कुछ तो शर्म करो
यों कब तक सहते जाओगे, इस परवशता के जीवन से
विद्रोह करो, विद्रोह…
10 months, 1 week ago
Mujhe Ab Darr Nahi Lagta | Mohsin Naqvi
Episode 970
मुझे अब डर नहीं लगता | मोहसिन नक़वी
किसी के दूर जाने से
तअ'ल्लुक़ टूट जाने से
किसी के मान जाने से
किसी के रूठ जाने से
मुझे अब डर नहीं लगता
किसी को आज़माने …
10 months, 1 week ago
Purana Ghar | Gobind Prasad
Episode 969
पुराना घर। गोबिंद प्रसाद
पुराना घर
इतना पुराना
कि कभी पुराना नहीं होता
कविता की उस किताब की तरह
पंक्तियों के बीच
ठहरे हुए किसी अनबीते की तरह
मन में बसा रहता…
10 months, 1 week ago
Dukh | Priyankshi Mohan
Episode 968
दुख | प्रियाँक्षी मोहन
पिताओं के दुख
माँओं के दुखों से
मुख़्तलिफ़ होते हैं।
वे कभी भी प्रत्यक्ष
रूप से नहीं दिखते
वे चूहों से झाँकते हैं
अधजली सिगरेटों से
खू…
10 months, 1 week ago
Phoole Kadamb | Nagarjun
Episode 967
फूले कदंब । नागार्जुन
फूले कदंब
टहनी-टहनी में कंदुक सम झूले कदंब
फूले कदंब।
सावन बीता
बादल का कोप नहीं रीता
जाने कब से तू बरस रहा
ललचाई आँखों से नाहक
जाने कब…
10 months, 2 weeks ago
Nafi | Kishwar Naheed
Episode 966
नफ़ी | किश्वर नाहीद
मैं थी आईना फ़रोश* (विक्रेता)
कोह-ए-उम्मीद* (आशा का पहाड़) के दामन में
अकेली थी ज़ियाँ* (नुक़्सान) कोशिश
सुरय्या की थी हम-दोश
मुझे हर …
10 months, 2 weeks ago