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Tanhai | Shahryar
Episode 974
Published 8 months ago
Description
तन्हाई । शहरयार
अँधेरी रात की इस रहगुज़र पर
हमारे साथ कोई और भी था
उफ़ुक़* (क्षितिज) की सम्त* (दिशा) वो भी तक रहा था
उसे भी कुछ दिखाई दे रहा था
उसे भी कुछ सुनाई दे रहा था
मगर ये रात ढलने पर हुआ क्या
हमारे साथ अब कोई नहीं है