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Safar Mein Dhoop To Hogi | Nida Fazli
Episode 893
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो | निदा फ़ाज़ली
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
किसी के वास्ते राहें …
10 months, 3 weeks ago
Preeti-Bhaint | Shrikant Verma
Episode 892
प्रीति-भेंट | श्रीकांत वर्मा
इतने दिनों के बाद अकस्मात मिले तो आँसुओं ने उसके उसे, मेरे मुझे
भरमा दिया,
आँसू जब थमे तो मैं कुछ और था, वह कुछ और-
वह मेरी …
10 months, 4 weeks ago
Havan | Shrikant Verma
Episode 891
हवन | श्रीकांत वर्मा
चाहता तो बच सकता था
मगर कैसे बच सकता था
जो बचेगा
कैसे रचेगा
पहले मैं झुलसा
फिर धधका
चिटखने लगा
कराह सकता था
मगर कैसे कराह सकता था
जो कराहे…
10 months, 4 weeks ago
Tumse Milne Par | Sunil Gangopadhyay
Episode 890
तुमसे मिलने पर | सुनील गंगोपाध्याय
अनुवाद : रोहित प्रसाद पथिक
तुमसे मिलने पर
मैं पूछता हूँ :
तुम मनुष्य से प्रेम नहीं करते हो,
पर देश से क्यों प्रेम करते …
10 months, 4 weeks ago
Amramanjariyon Ki Gandh | Gyanendrapati
Episode 889
आम्र-मंजरियों की गंध | ज्ञानेन्द्रपति
आम्र-मंजरियों की गंध
बसी रही मेरे घर में तुम्हारे जाने के बाद
पिछली बार
अबके तो
तुम्हारे जाने के बाद
आम्र-मंजरियों क…
11 months ago
Nahi Dikhegi Ma | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 888
नहीं दिखेगी माँ | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
नहीं दिखेगी माँ
फिर कभी इस रूप में
भोर होगा भिनुसार
चिरैया एक बोलेगी
तिलक चढ़ेगा यज्ञोपवीत
होगा कन्यादान
बस माँ नह…
11 months ago
Ek Fantasy | Dharamvir Bharti
Episode 887
एक फ़ैंटसी | धर्मवीर भारती
साँझ के झुटपुटे में,
जब कि दूर आस्माँ पर एक धुआँ-सा छा रहा था,
तारे अकुला रहे थे, चाँद थर्रा रहा था
चोट इतनी गहरी थी,
कि बादलों…
11 months ago
Bhoolna | Rachit
Episode 886
भूलना | रचित
कितना भयावह है
भूलने के बाद सिर्फ़ यह याद रहना
कि कुछ भूल गए हैं
उससे भी ज़्यादा पीड़ादायक है यह अनुभूति
कि वह भूला हुआ जब भी याद आएगा
हम जान …
11 months ago
Wahi Nahi Tha Premi | Anupam Singh
Episode 885
वही नहीं था प्रेमी | अनुपम सिंह
किसी दिन तुम पूछोगे मेरे प्रेमियों के नाम
मैं अपना निजी कहकर टाल जाऊँगी
लेकिन प्रेमी वही नहीं था
जिसने कोई वादा किया और न…
11 months ago
Raat ka Ped | Rahi Masoom Raza
Episode 884
रात का पेड़ | राही मासूम रज़ा
रास्ते
चाँदनी ओढ़ कर सो गए
झील पर नींद की सिलवटें पड़ गईं
आहटें
पहले पीली पड़ीं
और फिर
एक-एक करके सब झड़ गईं
रात का पेड़
दस्ते-द…
11 months ago