Podcast Episodes
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Lai Taal | Kailash Vajpeyi
Episode 955
लयताल।कैलाश वाजपेयी
कुछ मत चाहो
दर्द बढ़ेगा
ऊबो और उदास रहो।
आगे पीछे
एक अनिश्चय
एक अनीहा, एक वहम
टूट बिखरने वाले मन के
लिए व्यर्थ है कोई क्रम
चक्राकार अंगार …
10 months, 3 weeks ago
Kalkatta Ke Ek Tram Mein Madhubani Painting | Gyanendrapati
Episode 954
कलकत्ता के एक ट्राम में मधुबनी पेंटिंग।ज्ञानेन्द्रपति
अपनी कटोरियों के रंग उँड़ेलते
शहर आए हैं ये गाँव के फूल
धीर पदों से शहर आई है
सुदूर मिथिला की सिया …
10 months, 3 weeks ago
Ghar Mein Waapsi | Dhoomil
Episode 953
घर में वापसी । धूमिल
मेरे घर में पाँच जोड़ी आँखें हैं
माँ की आँखें पड़ाव से पहले ही
तीर्थ-यात्रा की बस के
दो पंचर पहिए हैं।
पिता की आँखें—
लोहसाँय की ठंडी …
10 months, 4 weeks ago
Ramz | Jaun Elia
Episode 952
रम्ज़ । जौन एलिया
तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे
मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं
मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें
मेरे कमरे में क…
10 months, 4 weeks ago
Baat Karni Mujhe Mushkil | Bahadur Shah Zafar
Episode 951
बात करनी मुझे मुश्किल । बहादुर शाह ज़फ़र
बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी
जैसी अब है तिरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी
ले गया छीन के कौन आज तिरा सब्र ओ क…
11 months ago
Bahut Door Ka Ek Gaon | Dheeraj
Episode 950
बहुत दूर का एक गाँव | धीरज
कोई भी बहुत दूर का एक गाँव
एक भूरा पहाड़
बच्चा भूरा और बूढ़ा पहाड़
साँझ को लौटती भेड़
और दूर से लौटती शाम
रात से पहले का नीला …
11 months ago
Suwar Ke Chaune | Anupam Singh
Episode 949
सूअर के छौने । अनुपम सिंह
बच्चे चुरा आए हैं अपना बस्ता
मन ही मन छुट्टी कर लिये हैं
आज नहीं जाएँगे स्कूल
झूठ-मूठ का बस्ता खोजते बच्चे
मन ही मन नवजात ब…
11 months ago
Ma Nahin Thi Wah | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 948
माँ नहीं थी वह । विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
माँ नहीं थी वह
आँगन थी
द्वार थी
किवाड़ थी,
चूल्हा थी
आग थी
नल की धार थी।
11 months ago
Ulahna | Agyeya
Episode 947
उलाहना।अज्ञेय
नहीं, नहीं, नहीं!
मैंने तुम्हें आँखों की ओट किया
पर क्या भुलाने को?
मैंने अपने दर्द को सहलाया
पर क्या उसे सुलाने को?
मेरा हर मर्माहत उलाहना
सा…
11 months ago
Pansokha Hai Indradhanush | Madan Kashyap
Episode 946
पनसोखा है इन्द्रधनुष - मदन कश्यप
पनसोखा है इन्द्रधनुष
आसमान के नीले टाट पर मखमली पैबन्द की तरह फैला है।
कहीं यह तुम्हारा वही सतरंगा दुपट्टा तो नहीं
जो…
11 months ago