Podcast Episodes
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Buddhu | Shankh Ghosh
Episode 945
बुद्धू।शंख घोष
मूल बंगला से अनुवाद : प्रयाग शुक्ल
कोई हो जाये यदि बुद्धू अकस्मात, यह तो
वह जान नहीं पाएगा खुद से। जान यदि पाता यह
फिर तो वह कहलाता बुद्धि…
11 months ago
Meri Khata | Amrita Pritam
Episode 944
मेरी ख़ता । अमृता प्रीतम
अनुवाद : अमिया कुँवर
जाने किन रास्तों से होती
और कब की चली
मैं उन रास्तों पर पहुँची
जहाँ फूलों लदे पेड़ थे
और इतनी महक थी—
कि साँसो…
11 months, 1 week ago
Purani Baatein | Shraddha Upadhyay
Episode 943
पुरानी बातें | श्रद्धा उपाध्याय
पहले सिर्फ़ पुरानी बातें पुरानी लगती थीं
अब नई बातें भी पुरानी हो गई हैं
मैंने सिरके में डाल दिए हैं कॉलेज के कई दिन
…
11 months, 1 week ago
Khali Makaan | Mohammad Alvi
Episode 942
ख़ाली मकान।मोहम्मद अल्वी
जाले तने हुए हैं घर में कोई नहीं
''कोई नहीं'' इक इक कोना चिल्लाता है
दीवारें उठ कर कहती हैं ''कोई नहीं''
''कोई नहीं'' दरवाज़ा शो…
11 months, 1 week ago
Kahan Tak Waqt Ke Dariya Ko | Shahryar
Episode 941
कहाँ तक वक़्त के दरिया को । शहरयार
कहाँ तक वक़्त के दरिया को हम ठहरा हुआ देखें
ये हसरत है कि इन आँखों से कुछ होता हुआ देखें
बहुत मुद्दत हुई ये आरज़ू करत…
11 months, 1 week ago
Kharab Television Par Pasandeeda Programme | Satyam Tiwari
Episode 940
ख़राब टेलीविज़न पर पसंदीदा प्रोग्राम देखते हुए | सत्यम तिवारी
दीवारों पर उनके लिए कोई जगह न थी
और नए का प्रदर्शन भी आवश्यक था
इस तरह वे बिल्लियों के …
11 months, 1 week ago
Free Will | Darpan Sah
Episode 939
फ़्री विल । दर्पण साह
अगस्त का महिना हमेशा जुलाई के बाद आता है,
ये साइबेरियन पक्षियों को नहीं मालूम
मैं कोई निश्चित समय-अंतराल नहीं रखता दो सिगरेटों क…
11 months, 1 week ago
Prarthna | Antonio Rinaldi | Translation - Dharamvir Bharti
Episode 938
प्रार्थना। अन्तोन्यो रिनाल्दी
अनुवाद : धर्मवीर भारती
सई साँझ
आँखें पलकों में सो जाती हैं
अबाबीलें घोसलों में
और ढलते दिन में से आती हुई
एक आवाज़ बतलाती है …
11 months, 1 week ago
Lagta Nahi Hai Dil Mera | Bahadur Shah Zafar
Episode 937
लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में । बहादुर शाह ज़फ़र
लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में
किस की बनी है आलम-ए-ना-पाएदार में
इन हसरतों से कह दो कहीं औ…
11 months, 1 week ago
Ghaas | Carl Sandburg | Translation - Dharamvir Bharti
Episode 936
घास । कार्ल सैंडबर्ग
अनुवाद : धर्मवीर भारती
आस्टरलिज़ हो या वाटरलू
लाशों का ऊँचे से ऊँचा ढेर हो—
दफ़ना दो; और मुझे अपना काम करने दो!
मैं घास हूँ, मैं सबको…
11 months, 2 weeks ago