Podcast Episodes
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Vismriti ka Phool | Gobind Prasad
Episode 1207
विस्मृति का फूल । गोबिंद प्रसाद
...मैं हूँ
मैं हूँ किसी का
...हूँ किसी का
सपना
देखा हुआ अनदेखा
अपना
स्मृति में जैसे बसा-किसी की
विस्मृति का फूल
बन, खिलने की ह…
1 week, 3 days ago
Rone Wala Hi Gaata Hai | Gopaldas Neeraj
Episode 1206
रोने वाला ही गाता है । गोपालदास नीरज
रोने वाला ही गाता है!
मधु-विष हैं दोनों जीवन में
दोनों मिलते जीवन-क्रम में
पर विष पाने पर पहले मधु-मूल्य अरे, कुछ बढ…
1 week, 4 days ago
Karbala | Rajesh Joshi
Episode 1205
कर्बला। राजेश जोशी
पानी पियो तो याद करो प्यास इमाम हुसैन की!
पानी पियो तो शुक्रिया अदा करो बादलों का
नदियों, तालाबों और समुंदरों का
शुक्रिया अदा करो समु…
1 week, 5 days ago
Jharkhand Ke Pahadon Ka Aranyarodan | Gyanendrapati
Episode 1204
झारखण्ड के पहाड़ों का अरण्यरोदन । ज्ञानेन्द्रपति
डबडबा आया है भुरुकवा
पूरब में भिनसार का भान है
चिड़ियों का उजला कलरव जागने से पहले
अँधियारी में एक काली…
1 week, 6 days ago
Phir Kahe Ki Dooriyan | Anwar Suhail
Episode 1203
फिर काहे की दूरियाँ । अनवर सुहैल
देखकर मुझको तुम्हें याद आती बिरयानी की
मिलकर मुझसे बातें करते शराब-शबाब से लबरेज़ ग़ज़लों की
तुम्हारे संवाद में अचानक …
2 weeks ago
Mitti Ki Kaaya | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 1202
मिट्टी की काया । विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
इसी में बहती है
मंदाकिनी अलकनंदा
इसी में चमकते हैं
कैलाश नील्कंठ
इसी में लिखते हैं
ब्रह्मकमल
इसी में फड़फड़ाते हैं
म…
2 weeks, 1 day ago
Tope | Viren Dangwal
Episode 1201
तोप । वीरेन डंगवाल
कंपनी बाग़ के मुहाने पर
घर रखी गई है यह 1857 की तोप
इसकी होती है बड़ी सम्हाल, विरासत में मिले
कंपनी बाग़ की तरह
साल में चमकाई जाती है …
2 weeks, 2 days ago
Zara Zara Sa | Sunita Jain
Episode 1200
ज़रा-ज़रा-सा। सुनीता जैन
जी में जी खुलता है
ज़रा-ज़रा-सा
फागुन ऋतु का बौर
हवा घुलता है
ज़रा-ज़रा-सा
गेरू रंग मधुमाखी है
रंग पीला ततै -
य्या ज़हरीला
तितली के त…
2 weeks, 3 days ago
Yehi hai Saadgi | Pablo Neruda | Translation - Prabhati Nautiyal
Episode 1199
यही है सादगी । पाब्लो नेरूदा
अनुवाद - प्रभाती नौटियाल
ख़ामोश है ताक़त (पेड़ बताते हैं मुझे)
और गहराई (बताती हैं जड़ें)
और शुद्धता (बताता है आटा)
किसी…
2 weeks, 4 days ago
Abhida Ki Ek Sham | Vivek Nirala
Episode 1198
अभिधा की एक शाम। विवेक निराला
एक छोटी शाम जो
लम्बी खिंचती जाती थी
बिल्कुल अभिधा में।
रक्ताभा लिए रवि
लुकता जाता था।
लक्षणा के लद चुके
दिनों के बाद
अभिधा क…
2 weeks, 5 days ago