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Andhere Ka Safar | Ramanath Awasthi
Episode 572
अँधेरे का सफ़र मेरे लिए है | रमानाथ अवस्थी
तुम्हारी चाँंदनी का क्या करूँ मैं
अँधेरे का सफ़र मेरे लिए है।
किसी गुमनाम के दुख-सा अनजाना है सफ़र मेरा
पहाड़…
1 year, 9 months ago
Naya Sach Rachne | Nandkishore Acharya
Episode 571
नया सच रचने | नंदकिशोर आचार्य
पत्तों का झर जाना
शिशिर नहीं
जड़ों में
यह सपनों की
कसमसाहट है-
अपने लिए
नया सच रचने की
ख़ातिर-
झूठ हो जाता है जो
खुद झर जाता है।
1 year, 9 months ago
Aatma | Anju Sharma
Episode 570
आत्मा | अंजू शर्मा
मैं सिर्फ
एक देह नहीं हूँ,
देह के पिंजरे में कैद
एक मुक्ति की कामना में लीन
आत्मा हूँ,
नृत्यरत हूँ निरंतर,
बांधे हुए सलीके के घुँघरू,
लौटा…
1 year, 9 months ago
Ladki | Anju Sharma
Episode 569
लड़की | अंजू शर्मा
एक दिन समटते हुए अपने खालीपन को
मैंने ढूँढा था उस लड़की को,
जो भागती थी तितलियों के पीछे
सँभालते हुए अपने दुपट्टे को
फिर खो जाया करती थ…
1 year, 9 months ago
Tumne Is Talaab Mein | Dushyant Kumar
Episode 568
तुमने इस तालाब में | दुष्यंत कुमार
तुमने इस तालाब में रोहू पकड़ने के लिए
छोटी-छोटी मछलियाँ चारा बनाकर फेंक दीं।
तुम ही खा लेते सुबह को भूख लगती है बहुत…
1 year, 9 months ago
Jantar Mantar | Arunabh Saurabh
Episode 567
जंतर-मंतर | अरुणाभ सौरभ
लाल - दीवारों
और झरोखे पर
सरसराते दिन में
सीढ़ी-सीढ़ी नाप रहे हो
जंतर-मतर पर
बोल कबूतर
मैंना बोली फुदक-फुदककर
बड़ी जालिम है।
जंतर-मंत…
1 year, 9 months ago
Padhiye Gita | Raghuvir Sahay
Episode 566
पढ़िए गीता | रघुवीर सहाय
पढ़िए गीता
बनिए सीता
फिर इन सब में लगा पलीता
किसी मूर्ख की हो परिणीता
निज घर-बार बसाइए
होंय कैँटीली
आँखें गीली
लकड़ी सीली, तबियत ढील…
1 year, 9 months ago
Saathi | Kedarnath Agarwal
Episode 565
साथी | केदारनाथ अग्रवाल
झूठ नहीं सच होगा साथी।
गढ़ने को जो चाहे गढ़ ले
मढ़ने को जो चाहे मढ़ ले
शासन के सी रूप बदल ले
राम बना रावण सा चल ले
झूठ नहीं सच होगा…
1 year, 9 months ago
Milna Tha Itefaaq Bichadna Naseeb Tha | Anjum Rehbar
Episode 564
मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था | अंजुम रहबर
मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था
वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था
मैं उस को देखने को तरसती ही रह गई…
1 year, 9 months ago
Pooch Rahe Ho Kya Abhaav Hai | Shailendra
Episode 563
पूछ रहे हो क्या अभाव है | शैलेन्द्र
पूछ रहे हो क्या अभाव है
तन है केवल, प्राण कहाँ है ?
डूबा-डूबा सा अन्तर है
यह बिखरी-सी भाव लहर है,
अस्फुट मेरे स्वर हैं…
1 year, 9 months ago