Podcast Episodes
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Ghisi Pencil | Raghuvir Sahay
Episode 662
घिसी पेंसिल | रघुवीर सहाय
फिर रात आ रही है।
फिर वक्त आ रहा है।
जब नींद दुःख दिन को
संपूर्ण कर चलेंगे
एकांत उपस्थत हो, 'सोने चलो' कहेगा
क्या चीज़ दे रही है…
1 year, 8 months ago
Seekho | Shrinath Singh
Episode 661
सीखो | श्रीनाथ सिंह
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना।
तरु की झुकी डालियों से नित, सीखो शीश झुकाना!
सीख हवा के झोकों से लो, हिलना, जगत हिलाना!…
1 year, 8 months ago
Apahij Vyatha | Dushyant Kumar
Episode 660
अपाहिज व्यथा | दुष्यंत कुमार
अपाहिज व्यथा को सहन कर रहा हूँ,
तुम्हारी कहन थी, कहन कर रहा हूँ ।
ये दरवाज़ा खोलो तो खुलता नहीं है,
इसे तोड़ने का जतन कर रह…
1 year, 8 months ago
Dhool | Hemant Deolekar
Episode 659
धूल | हेमंत देवलेकर
धीरे-धीरे साथ छोड़ने लगते हैं लोग
तब उन बेसहारा और यतीम होती चीज़ों को
धूल अपनी पनाह में लेती है।
धूल से ज़्यादा करुण और कोई नहीं
संस…
1 year, 8 months ago
Donon Jahan Teri Mohabbat Me Haar Ke | Faiz Ahmed Faiz
Episode 658
दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के | फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
वीराँ है मय-कदा ख़ुम-ओ-साग़…
1 year, 8 months ago
Berozgaar Hum | Shanti Suman
Episode 657
बेरोज़गार हम / शांति सुमन
पिता किसान अनपढ़ माँ
बेरोज़गार हैं हम
जाने राम कहाँ से होगी
घर की चिन्ता कम
आँगन की तुलसी-सी बढ़ती
घर में बहन कुमारी
आसमान में चिड…
1 year, 8 months ago
Tumse Milkar | Gaurav Tiwari
Episode 656
तुमसे मिलकर | गौरव तिवारी
नदी अकेली होती है,
पर उतनी नहीं
जितनी अकेली हो जाती है
सागर से मिलने के बाद।
धरा अत्यधिक अकेली होती है
क्षितिज पर,
क्योंकि वहाँ म…
1 year, 8 months ago
Ek Dua | Kaifi Azmi
Episode 655
एक दुआ | कैफ़ी आज़मी
अब और क्या तेरा बीमार बाप देगा तुझे
बस एक दुआ कि ख़ुदा तुझको कामयाब करे
वो टाँक दे तेरे आँचल में चाँद और तारे
तू अपने वास्ते जिस को…
1 year, 8 months ago
Ghat ti Hui Oxygen | Manglesh Dabral
Episode 654
घटती हुई ऑक्सीजन | मंगलेश डबराल
अकसर पढ़ने में आता है
दुनिया में ऑक्सीजन कम हो रही है।
कभी ऐन सामने दिखाई दे जाता है कि वह कितनी तेज़ी से घट रही है
रास्त…
1 year, 9 months ago
Hum Auratein | Viren Dangwal
Episode 653
हम औरतें | वीरेन डंगवाल
रक्त से भरा तसला है
रिसता हुआ घर के कोने-अंतरों में
हम हैं सूजे हुए पपोटे
प्यार किए जाने की अभिलाषा
सब्जी काटते हुए भी
पार्क में अप…
1 year, 9 months ago