Podcast Episodes
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Usne Kaha | Shiv Kumar Gandhi
Episode 1169
उसने कहा । शिव कुमार गांधी
उसने कहा मुझसे ले चलो अपने शहर
जो कहोगे वही करूँगा
फिर पकड़ाई चाय जो गैस के
चूल्हे पर बनी थी
मैंने कहा मज़ाक़ में -
जगह बदल लेत…
1 month, 2 weeks ago
Is Ghat-Antar Baag-Bageeche | Kabir
Episode 1168
इस घट-अंतर बाग़-बगीचे । कबीर
इस घट-अंतर बाग़-बगीचे इसी में सिरजनहारा
इस घट-अंतर सात समुंदर इसी में नौ लख तारा
इस घट-अंतर पारस मोती इसी में परखनहारा
इस घट…
1 month, 3 weeks ago
Kya Kiya | Sushma Kumari
Episode 1167
क्या किया। सुषमा कुमारी
घोर अँधेरे में
जब 'मुक्तिबोध' के शब्द
गूंजते हैं कानों में
- 'कहो इस जीवन में क्या किया?
किसी मेमने की तरह
घबराई,
मैं भागने लगती हू…
1 month, 3 weeks ago
Be-Awaaz | Veeru Sonkar
Episode 1166
बे-आवाज़ । वीरू सोनकर
जहाँ भाषा चूकती है
और अर्थ बे-आवाज़ ही रह जाते हैं
जहाँ शब्दों को कोई ईश्वर नहीं मानता
हम वहाँ मिलेंगे
और अपनी चुप्पियों में कहेंगे
क…
1 month, 3 weeks ago
Meri Ma Ek Patang Hai | Kumar Divyanshu Shekhar
Episode 1165
मेरी माँ एक पतंग है । कुमार दिव्यांशगु शेखर
पतंग बने।
नियत हुआ आकाश;
पर किसी तौर
उन्हें भाते रहे
तार,
पटरियों के ऊपर बिछे समानांतर।
ओ मेरी मातः!
तुम एक …
1 month, 3 weeks ago
Harmony | Hemant Deolekar
Episode 1164
हार्मनी। हेमंत देवलेकर
सफ़ेद ओर काला अलग रहेंगे
तो नस्ल कहायेंगे
मिलकर रहेंगे तो संगीत
हारमोनियम
साहचर्य की एक मिसाल है।
उंगलियों के बीच की खली जगह
उंगलियो…
1 month, 3 weeks ago
Ummeed | Shailay
Episode 1163
उम्मीद । शैलेय
अँजुरी भर जल
तलुवे भर ओस
आँख भर सपना
नींद भर लोरी
हौसले को
जुगनू भर हिक़मत
जुटा ही लेनी चाहिए
नामुराद अंधड़ में
कुछ तो मिट्टी टूटने से बचेगी
कुछ…
1 month, 3 weeks ago
Ek Abhineta Ki Thakaan | Agney
Episode 1162
एक अभिनेता की थकान। आग्नेय
वह रंगमंच पर जा चुका है
वह अपनी भूमिका पूरी कर चुका है
उतार दी है पोशाक
उस चरित्र की जिसका अभिनय किया उसने
वह नहीं जानता
जब वह र…
1 month, 3 weeks ago
Yah Number Maujood Nahi Hai | Manglesh Dabral
Episode 1161
यह नंबर मौजूद नहीं । मंगलेश डबराल
दिस नंबर डज़ नॉट एग्ज़िस्ट
जहाँ भी जाता हूँ जो भी फ़ोन मिलाता हूँ
अक्सर एक बेगानी-सी आवाज़ सुनाई देती है
दिस नंबर डज़ …
1 month, 4 weeks ago
Tum Ho | Nazim Hikmat
Episode 1160
तुम हो । नाज़िम हिकमत
अनुवाद : सुरेश सलिल
तुम्हीं मेरी ग़ुलामी हो, तुम्हीं मेरी आज़ादी
गर्मियों की किसी बेलिबास रात की तरह मेरा जिस्म
मेरा वतन हो तुम
पन्…
1 month, 4 weeks ago