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मेरी मम्मी का लव लेटर | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
उस दोपहर घर के कबाड़ वाले कमरे में कुछ ढूंढते हुए मेरी नज़र एक पुरानी किताब पर पड़ी. धूल से पटी वो किताब कोई नॉवेल थी. मैंने उसे खोला तो अंदर से एक क…
1 year, 6 months ago
वीकेंड के क्रांतिकारी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
बहुत पुराने वक्त की बात है. एक शहर था जहां सब कुछ ठीक था. ठीक इसलिए था क्योंकि उस शहर में कोई किसी से शिकायत नहीं करता था. लोगों में ज़ब्त का बड़ा मा…
1 year, 6 months ago
पहली सी मुहब्बत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
हम उस जेनरेशन से आते हैं जो इश्क़ करना फिल्मों से सीखती है जहां हर पल कुछ हो रहा होता है. कोई शरारत, कोई बात, कोई बातचीत. हम समझते हैं कि इश्क़ में ऐ…
1 year, 6 months ago
मुझे बच्चों से बचाओ | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
हमारे मुहल्ले में एक साहब रहते हैं जिनके 6 बच्चे हैं और सारे के सारे बच्चे इतने शैतान कि जिस तरफ जाते हैं लगता है टिड्डी किसी खेत पर हमला करने जा रहे…
1 year, 6 months ago
चलो एक बार फिर से | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
"दुनिया में औलाद और मां-बाप की ये कहानी हज़ारों बार दोहराई जा चुकी है पर ये कहानी है कि कभी पुरानी नहीं होती. ये कहानी तब तक दोहराई जाएगी जब तक औलादे…
1 year, 7 months ago
कौन बशारत अली? स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
उनकी हर बात 'नहीं' से शुरु होती थी. मान लीजिए आप उनसे कहें कि आज बड़ी सर्दी है, वो कहेंगे "नहीं, कल ज़्यादा पड़ेगी" आप कहिए, "मैं कल सड़क पर फिसल कर …
1 year, 7 months ago
दा निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस में मिले दो अजनबी खेलते हैं ट्रेन में कौन सा ख़तरनाक खेल? सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की नई थ्रिलर कहानी - दा निज़ामुद्दीन एक्स…
1 year, 7 months ago
The New Year Psycho | दा न्यू ईयर साइको | स्टोरीबॉक्स
वो नए साल की रात थी... चैपल स्ट्रीट से घर लौटते एक शख्स को एक औरत की लाश पड़ी मिली... लाश का सर धड़ से अलग था. और उसे बेरहमी से मारा गया था. जिस्म के…
1 year, 7 months ago
मेरे पति की पतलून | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
"तुम कहना क्या चाहती हो, क्या ये कह रही हो कि मैं नहाता नहीं हूं, मैं तो रोज़ नहाता हूं बल्कि दिन में दो बार नहाता हूं" - "देखिए, दो डोंगा पानी डाल क…
1 year, 8 months ago
कफ़न चोर | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
सर्द रात में उसकी बेटी बुखार से बुरी तरह से तप रही थी लेकिन उसकी जेब में इतना पैसा भी नहीं था कि एक चादर ख़रीद सकता. बेटी अपनी कंपकपी छुपा रही थी ताक…
1 year, 8 months ago