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पर्दा | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
पर्दा | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

चौधरी साहब के दादा एक ज़माने में दारोग़ा थे, बढ़िया आमदनी थी, ठाठ थे. उनके दो बेटे हुए फिर दोनों बेटों के बच्चे. जब ये बच्चे बड़े हुए तब तक चौधरी खान…

4 months, 1 week ago

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मरीज़ की आख़िरी ख़्वाहिश | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
मरीज़ की आख़िरी ख़्वाहिश | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

नव्या की ज़िंदगी बस कुछ पलों की मेहमान थी, डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए थे. नव्या ने अपने पिता दीवान साहब, जो कचहरी में बड़े क्लर्क थे, उन्हें अपनी…

4 months, 2 weeks ago

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मुशायरे में भैंस | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
मुशायरे में भैंस | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

हकीम अहसानुल्लाह साहब के पास एक ऐसा नुस्खा था जिसके बारे में कहा जाता था कि बेऔलाद लोग अगर पान में दबाकर खा लें तो औलाद हो जाती है. शायरी के शौकीन हक…

4 months, 3 weeks ago

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दिल आज शायर है | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
दिल आज शायर है | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

वो शायर था लेकिन उसका असली काम कब्रें खोदना था. वो उसी कब्रिस्तान में रहता था जहां काम करते हुए उसके पिता ने उसे शायरी भी सिखाई और कब्र खोदना भी... व…

5 months ago

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अख़बार में नाम | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
अख़बार में नाम | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

उस आदमी की ख्वाहिश बस इतनी थी कि वो अख़बार में अपना नाम छपा हुआ देखना चाहता था. इस एक ख्वाहिश के लिए वो कुछ भी करने को तैयार था. तो उसने अपनी मौत का …

5 months, 1 week ago

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किराए का मकान | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
किराए का मकान | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

उन्हें किराए का मकान चाहिए था लेकिन उनके पास कोई कागज़ नहीं था. उनकी भाषा भी अलग थी और कपड़े भी कुछ अलग परिवेश के थे, पर उनकी एक कहानी थी. एक उदास कह…

5 months, 2 weeks ago

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साग-मीट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
साग-मीट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

"मेरे तो तीन-तीन डिब्बे घी के महीने में निकल जाते हैं. नौकरों के लिए डालडा रखा हुआ है लेकिन कौन जाने ये मुए हमें डालडा खिलाते हों और खुद देसी घी हड़प…

5 months, 3 weeks ago

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एक नास्तिक की GOD से मुलाक़ात | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक नास्तिक की GOD से मुलाक़ात | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

वो नास्तिक थे, कभी किसी धर्म या मज़हब को नहीं माना... पूरी ज़िंदगी कहते रहे कि मौत के बाद कुछ नहीं है... एक रोज़ अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा और दुन…

6 months ago

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एक क्रिमिनल की न्यू ईयर नाइट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक क्रिमिनल की न्यू ईयर नाइट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

साल की आखिरी रात थी. पूरा शहर जश्न में डूबा हुआ था, लेकिन तभी पुलिस की तरफ़ से ऐलान हुआ कि कुछ संदिग्ध शहर में देखे गए हैं. उन दिनों मैं एक कैफे़ में…

6 months ago

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एक फ़र्ज़ी इंटलैक्चुअल | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक फ़र्ज़ी इंटलैक्चुअल | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

एक थे बन्ने भाई, कानपुर में उनकी कोयले की दुकान थी जहां दिन भर वो ग्राहकों के साथ झकमारी करते थे लेकिन शाम को घर आते ही सफ़ेद सिल्क का कुर्ता-पायजामा…

6 months, 1 week ago

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