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साग-मीट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
Published 7 months, 1 week ago
Description
"मेरे तो तीन-तीन डिब्बे घी के महीने में निकल जाते हैं. नौकरों के लिए डालडा रखा हुआ है लेकिन कौन जाने ये मुए हमें डालडा खिलाते हों और खुद देसी घी हड़प जाते हों. आज के ज़माने में किसी का एतबार नहीं किया जा सकता, मैं ताले तो लगा नहीं सकती. ये दूसरा नौकर मथरा सात रोटियां सवेरे और सात रोटियां गिनकर शाम को खाता है और बहन, बीच में इसे दो बार चाय भी चाहिए... और घर में जो मिठाई हो वो भी इसे दो. लेकिन मैं कहती हूं, “ठीक है, कम से कम टिका तो है, भई आजकल किसी नौकर का भरोसा थोड़ी है. कब कह दे - मैं जा रहा हूँ. ये भी मुझे यही कहते हैं, 'कुत्ते के मुंह में हड्डी दिए रहो तो नहीं भौंकेगा" - सुनिए भीष्म साहनी की मशहूर कहानी 'साग मीट' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
साउंड मिक्सिंग - सूरज सिंह
साउंड मिक्सिंग - सूरज सिंह