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Akanksha | Nandkishore Acharya
Episode 1249
Published 1 month ago
Description
आकाँक्षा । नंदकिशोर आचार्य
एक अतीत रक्त की भाँति
प्रवाहित रहता है मुझमें
एक भविष्य ने साँसों की तरह
बाँध रखा है मुझे
और मैं - घड़ी को सुई -
भविष्य के अतीत में बदलने की
सूचना मात्र देता रह जाता हूँ।
क्या कभी नहीं हो सकता यह
एक पल के लिए ही सही
अतीत और भविष्य
मुझमें न मिल पाएँ
और तब मैं
मेरा सहारा लेने के लिए हाथ फैलाते
भयभीत ईश्वर
और मृत्यु को
शून्य में छटपटाते हुए
देख लूँ!