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Gehri Raat Hai | Zeb Ghauri
Episode 1247
Published 1 month ago
Description
गहरी रात है । ज़ेब ग़ौरी
गहरी रात है और तूफ़ान का शोर बहुत
घर के दर-ओ-दीवार भी हैं कमज़ोर बहुत
दर-ओ-दीवार: दरवाज़ा और दीवार
तेरे सामने आते हुए घबराता हूँ
लब पे तेरा इक़रार है दिल में चोर बहुत
इक़रार: स्वीकार करना
नक़्श कोई बाक़ी रह जाए मुश्किल है
आज लहू की रवानी में है ज़ोर बहुत
नक़्श: रेखाचित्र
दिल के किसी कोने में पड़े होंगे अब भी
एक खुला आकाश पतंगें डोर बहुत
मुझ से बिछड़ कर होगा समुंदर भी बेचैन
रात ढले तो करता होगा शोर बहुत
आ के कभी वीरानी-ए-दिल का तमाशा कर
इस जंगल में नाच रहे हैं मोर बहुत
वीरानी-ए-दिल: मन के वीरान होने की अवस्था
अपने बसेरे पंछी लौट न पाया 'ज़ेब'
शाम घटा भी उट्ठी थी घनघोर बहुत