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Mitti Ki Kaaya | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 1202
Published 2 months, 2 weeks ago
Description
मिट्टी की काया । विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
इसी में बहती है
मंदाकिनी अलकनंदा
इसी में चमकते हैं
कैलाश नील्कंठ
इसी में लिखते हैं
ब्रह्मकमल
इसी में फड़फड़ाते हैं
मानसर के हंस
मिट्टी की काया है यह
इसी में छिपती है
ब्रह्मांड की वेदना।