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Hatheli Ki Lakeerein | Madhav Kaushik
Episode 1170
Published 1 month, 2 weeks ago
Description
हथेली की लकीरें । माधव कौशिक
चले तो साथ थे लेकिन न जाने कैसे हुआ
तुम्हारा हाथ किसी पिछले जन्म में शायद
हमारे हाथ से छूटा तो छूटता ही गया
हज़ारों साल से बिछड़ी हुई हैं दो आँखें
हज़ारों साल में जाकर कभी मिलें तो मिलें
कोई सुराग़ नहीं है इसीलिए शायद
हथेलियों की लकीरों में ढूंँढता हूँ तुझे