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Pyar Karta Hun | Kailash Vajpeyi

Pyar Karta Hun | Kailash Vajpeyi

Episode 1097 Published 4 months ago
Description

प्यार करता हूँ | कैलाश वाजपेयी


माथे की आँच से


डोरा सुलगता है

मोम नहीं गलता


देह बंद नदिया

उफनाती है


नीली फिर काली फिर श्वेत हो जाती है

दार्शनिक उँगलियों से


चितकबरे फूल नहीं

झरती है राख


असहाय होता हूँ

जब-जब रिक्त होता हूँ


प्यार करता हूँ

वहीं एक सीढ़ी है नीचे उतरकर


दुनिया कहलाने की।

सागर के नीचे दरार है


किरन कतराती है

पत्थर सरकाकर


राह निकल जाती है

हवा की चोट से


बाँस झुलस जाता है

हरा-भरा अंधकार होता हूँ


प्यार करता हूँ

वही एक शर्त है


ज़िंदा रह जाने की।

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