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Main Neer Bhari | Mahadevi Verma

Main Neer Bhari | Mahadevi Verma

Episode 1075 Published 4 months, 3 weeks ago
Description

मैं नीर भरी | महादेवी वर्मा


मैं नीर भरी दु:ख की बदली!

स्पंदन में चिर निस्पंद बसा;


क्रंदन में आहत विश्व हँसा,

नयनों में दीपक-से जलते


पलकों में निर्झरिणी मचली!

मेरा पग-पग संगीत-भरा,


श्वासों से स्वप्न-पराग झरा,

नभ के नव रँग बुनते दुकूल,


छाया में मलय-बयार पली!

मैं क्षितिज-भृकुटि पर घिर धूमिल,


चिंता का भार, बनी अविरल,

रज-कण पर जल-कण हो बरसी


नवजीवन-अंकुर बन निकली!

पथ को न मलिन करता आना,


पद-चिह्न न दे जाता जाना,

सुधि मेरे आगम की जग में


सुख की सिहरन हो अंत खिली!

विस्तृत नभ का कोई कोना;


मेरा न कभी अपना होना,

परिचय इतना इतिहास यही


उमड़ी कल थी मिट आज चली!

मैं नीर भरी दु:ख की बदली!


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