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Mil Hi Jayega Kabhi | Ahmed Mushtaq

Mil Hi Jayega Kabhi | Ahmed Mushtaq

Episode 1064 Published 5 months ago
Description

मिल ही जाएगा कभी | अहमद मुश्ताक़


मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है

वो इसी शहर की गलियों में कहीं रहता है


जिस की साँसों से महकते थे दर-ओ-बाम तिरे        

ऐ मकाँ बोल कहाँ अब वो मकीं रहता है        


इक ज़माना था कि सब एक जगह रहते थे

और अब कोई कहीं कोई कहीं रहता है


रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए

इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है


दिल फ़सुर्दा तो हुआ देख के उस को लेकिन 

उम्र भर कौन जवाँ कौन हसीं रहता है

 फ़सुर्दा: मुरझाया हुआ

 दर-ओ-बाम: (लाक्षणिक) मकान

  मकीं: मकान में रहने वाला 

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