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Shashwat | Doodhnath Singh
Episode 1017
Published 6 months, 3 weeks ago
Description
शाश्वत । दूधनाथ सिंह
यह उदासी जन्म से ही है।
यह सहज, संभाव्य अकुलाहट
मौन में यह दबी घबराहट
यह तुम्हारा अंतरिक्ष-अभाव-तट
कौन जानेगा कि यह जो बादलों में टँका मेरा हठ—
तुम्हारे लिए—यह सच
जन्म से ही है।
और कोई एक भाषा-विपद
और कोई एक कवि-पद
और कोई एक हाहाकार
और कोई तुम—सतत...
कुछ भी हो—
सभी कुछ है बराबर... सभी कुछ है व्यर्थ
सभी कुछ है साधु...
लेकिन यह तुम्हारा अंतरिक्ष-अभाव तट
यह उदासी-भरा हठ—यह
जन्म से ही है।