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Aao Prem Deep Ek Agyaat Jalao | Nirmala Putul
Episode 1005
Published 7 months ago
Description
आओ प्रेम दीप एक अज्ञात जलाओ - निर्मला पुतुल
आओ मन के सूने आँगन आओ
प्रेम पूरित भाव अनोखा
एक मन हर दीप जलाओ
घर पूरा रौशन हो जावे
जो दूर भगावे अंधियारे
आओ भी
ओलती आँगन ताखा भनसा गोहाल गलियारा
वो तुलसी चौराहा
सर्वत्र आस के सपने सजाओ
बरसों से बेजान हुई बस्ती की
वो बुधनी काकी
उसकी देहरी कुटिया आओ और अन्तरंग उसकी उम्मीद बनो
कोई एक दीप दिखाओ
काल कोठरी कब तक है जीना
प्रिय के न आने तक ठीक कहाँ है
आँखों का पथराना
तेल बिना जब सूखे जब जब बाती
ले आना सम्वेदन मन में
जहाँ गिले शिकवे भूल सारे
संरक्षित रहते मानवता
धन आओ
मन के सूने आँगन आओ
जहाँ न कोई अनुबंध
प्रेम दीप एक अज्ञात जलाओ