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Swapn Me Bhi Swapn Ke Bahar | Adnan Kafeel Darwesh

Swapn Me Bhi Swapn Ke Bahar | Adnan Kafeel Darwesh

Episode 857 Published 1 year ago
Description

स्वप्न में भी स्वप्न के बाहर | अदनान कफ़ील दरवेश 


सोचो तो

घर भी एक गुल्लक है।

जिसमें बजते हैं

तरल-ठोस दिन

खड़-खड़ उदास...

कागज़ हैं दीवारें

जिन्हें सोख लिया है

ढेर सारे समय का बजता पानी

अहाते में हैं

इमली और अमरूद के चमकदार दरख़्त

दो बुज़ुर्गों की तरह खड़े

शायद बच्चे हों

बुत बने

किसी बरहम हुए खेल के बीच

रेहल पर धरा है कलाम-पाक

हरे ग़िलाफ़ में बन्द

रोककर समय की धार


दीवार घड़ी

मुँह फेरे टँगी है

अलमारी के थोड़ा-सा ऊपर 

एक रहस्यमयी ख़ुशबू का झोंका

हवा के साथ उड़ता हुआ

पास से गुज़र जाता है

रौशनदान से झरती है चाँदनी

अचरज की तरह

मैं भटकता हूँ मुँह-अँधेरे

किसी और समय में

चुपचाप...

घर एक द्वीप है

समंदर में

दूर से चमकता

अजगर की गुंजलकों में कसा

मैं स्वप्न में भी

स्वप्न के बाहर

बुरी तरह हाँफता...


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