Episode Details

Back to Episodes
Itihaas | Naresh Saxena

Itihaas | Naresh Saxena

Episode 620 Published 1 year, 7 months ago
Description

इतिहास | नरेश सक्सेना 


बरत पर फेंक दी गई चीज़ें,

 ख़ाली डिब्बे, शीशियाँ और रैपर 

ज़्यादातर तो बीन ले जाते हैं बच्चे,

बाकी बची, शायद कुछ देर रहती हो शोकमग्न

लेकिन देखते-देखते 

आपस में घुलने मिलने लगती हैं।

मनाती हुई मुक्ति का समारोह।

बारिश और ओस और धूप और धूल में मगन

उड़ने लगती हैं उनकी इबारतें

मिटने लगते हैं मूल्य और निर्माण की तिथियाँ

छपी हुई चेतावनियाँ होने लगतीं अदृश्य

कंपनी की मॉडल के स्तनों पर लगने लगती है फफूंद

चेहरे पर भिनकती हैं मक्खियाँ

एक दिन उनके ढेर पर उगता है

एक पौधा-पौधे में फूल

फूलों में उन सबका सौंद्य

और

ख़ुश्बू में उनका इतिहास।


Listen Now

Love PodBriefly?

If you like Podbriefly.com, please consider donating to support the ongoing development.

Support Us