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Hum Laut Jayenge |  Shashiprabha Tiwari

Hum Laut Jayenge | Shashiprabha Tiwari

Episode 550 Published 1 year, 10 months ago
Description

हम लौट जाएंगे | शशिप्रभा तिवारी


कितने रात जागकर 

हमने तुमने मिलकर  

सपना बुना था 

कभी इस नीम की डाल पर बैठ 

कभी उस मंदिर कंगूरे पर बैठ 

कभी तालाब के किनारे बैठ 

कभी कुएं के जगत पर बैठ 

बहुत सी कहानियां 

मैं सुनाती थी तुम्हें 

ताकि उन कहानियों में से 

कुछ अलग कहानी 

तुम लिख सको

और अपनी तकदीर 

बदल डालो


कितने रात जागकर 

हमने तुमने मिलकर 

सपना बुना था 


साथ तुम्हारे हम भी 

दुनिया के रंग देख पाते!

 लेकिन, परंतु, 

और बहुत से सवाल

व्यवस्था-व्यवसाय!

यूं छूट गईं, 

उन दिवारों पर

नाहक, भाग्य बदलने की

कोशिश में तुम 

रोज पिसती रहीं होंगी,

अपना दुख छिपातीं होंगी 


कितने रात जागकर 

हमने तुमने मिलकर 

सपना बुना था 


बंद दरवाज़े के

पीछे का सच

कौन जान सकता है?

हम तो संसार में 

खाली हाथ आए थे 

और खाली हाथ ही लौट 

जाएंगे।

उस नीम की डाल को न देखेंगे!

न उस बसेरे को

न उस बस्ती को

उजड़े हुए, लोग 

बसाए घर के 

उजड़ने का दर्द भला 

क्या महसूस करेंगे?


कितने रात जागकर 

हमने तुमने मिलकर 

सपना बुना था।


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