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Sankraman | Satyam Tiwari

Sankraman | Satyam Tiwari

Episode 333 Published 2 years, 5 months ago
Description

संक्रमण | सत्यम तिवारी

रेखा के उस पार सब संदिग्ध थे

इस तरह वह लंपट था और मुँहफट

सूचियों से नदारद

चौकसी से अंजान
वह जिस देवता को फूल चढ़ाता

उसकी कृपा चट्टानी पत्थरों के बरक्स ढुलकती

उसकी प्रार्थना अँधेरी काली सड़कों-सी अंतहीन

जहाँ नीचे वाला ही ऊपर वाला हो

वहाँ फाँसी के फंदे पर

गिलोटिन के तख्ते पर

उन्मादियों के झंडे पर

वह किसके भरोसे चढ़ा?

अगर उसे अपने ही गुनाहों की सजा मिली

तो उसका होना इतना भी बुरा नहीं होता

वह जो समय रहते कालातीत हो गया

उसके लिए मैं ठीक इस जगह पर

एक पंक्ति भी नहीं सोच सका

यह कितना गलत होता

अगर उसके बारे में मैं गलत होता

यह कितना गलत होता

अगर इस बारे में मैं सही होता

बात गुलमोहर और अनजान गलियों की नहीं है

है तो यह जीवन और मृत्यु में

श्रेष्ठताबोध की भी नहीं

लेकिन जब लोग कहते हैं कि उन्हें जीना पड़ा

तो लगता है कि मरने को मिला होता तो मर गए होते!

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