Episode Details

Back to Episodes
Naye Saal Par | Snehamayi Choudhary

Naye Saal Par | Snehamayi Choudhary

Episode 281 Published 2 years, 6 months ago
Description

नए साल पर | स्नेहमयी चौधरी 

दोपहर जिस समय 

थोड़ी देर के लिए स्थिर हो जाती है, 

चहल-पहल रुकती-सी जान पड़ती है, 

उस पार का जंगल गहरा हरा हो उठता है, 

अपने कामों की गिनती करते-करते 

जब सिर ऊपर उठाती हूँ— 

सूरज दूसरी दिशा में पहुँच चुकता है।


दिन सरक कर चिड़ियों के पंखों में 

दुबक जाता है। 

मैं अपने को वहीं बैठी पाती हूँ 

जहाँ सुबह थी। 


हर साल की तरह 

पिछले सारे अधूरे कामों की गड्डी की ओर से 

आँख बंद कर 

नया कुछ करने की सोचते-सोचते... 


एक दिन और ढल जाता है। 

Listen Now

Love PodBriefly?

If you like Podbriefly.com, please consider donating to support the ongoing development.

Support Us