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सबसे ख़ूबसूरत तुम | स्टोरीबॉक्स | EP 07
Published 3 years, 6 months ago
Description
जिस्म के किसी हिस्से का जिस्म से अलग हो जाना कितना तकलीफदेह है, एक मर्द होकर मैं ये बात सिर्फ समझने की कोशिश कर सकता था लेकिन मेरी पत्नी जब भी अपनी देह छूती तो उसकी आंखे नम हो जाती थीं। बेतहाशा दर्द और चुभन उसके चेहरे पर थी। लेकिन उस वक्त ये सबसे ज़रूरी था कि उसे याद दिला दूं कि वो अब भी सबसे ख़ूबसूरत है। सुनिए स्टोरीबॉक्स में एकता नाहर की लिखी कहानी - 'सबसे ख़ूबसूरत तुम' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से